हिल असेंबली पहाड़िया महासभा का सिंगा मैदान में विशाल कार्यक्रम

हिल असेंबली पहाड़िया महासभा का सिंगा मैदान में विशाल कार्यक्रम
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हिल असेंबली पहाड़िया महासभा का सिंगा मैदान में विशाल कार्यक्रम

पी-पेसा कानून लागू करने सहित कई मांगें रखी गईं

बरहरवा।
बरहेट प्रखंड के सिंगा मैदान में गुरुवार को हिल असेंबली पहाड़िया महासभा झारखंड के बैनर तले एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष शिवचरण मालतो ने किया। हजारों की संख्या में आदिम जनजाति के महिला–पुरुष शामिल हुए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में—

  • डेविड माल्टो (सचिव)
  • रामकुमार पहाड़िया (सलाहकार)
  • कमलेश्वर पहाड़िया (प्रवक्ता)
  • तिलोटी माल्टो (जिला अध्यक्ष, साहिबगंज)
  • रामजीवन देहरी (जिला अध्यक्ष, दुमका)
    तथा संथाल परगना के कई वरिष्ठ पहाड़िया नेता मौजूद रहे।

मंच पर “सौरिया कंट्री जिंदाबाद” और “जबरा उर्फ तिलका मांझी जिंदाबाद” के नारे गूंजते रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से की गई।


आदिम जनजाति की स्थिति पर चिंता व्यक्त

सभी वक्ताओं ने संथाल परगना में पहाड़िया समुदाय की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि—

  • आजादी के 75 साल बाद भी सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ कई पहाड़िया क्षेत्रों में नहीं पहुंचीं।
  • समुदाय को अब तक पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिसके कारण उनकी आवाज शासन तक नहीं पहुँच पाती।
  • चुनाव के समय नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन समस्याएँ वहीं की वहीं रह जाती हैं।

NPT Act 1949 के उल्लंघन पर आपत्ति

वक्ताओं ने कहा कि—

  • पहाड़िया बहुल क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध खनन, क्रैशर संचालन और जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
  • इससे पहाड़िया जनजाति का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।

पी-पेसा Act लागू न होने पर रोष

अनुसूचित क्षेत्रों में PESA Act 1996 लागू न होने को समुदाय ने अपनी सबसे बड़ी समस्या बताया।
इसके कारण—

  • ग्रामसभा के अधिकार कमजोर हैं
  • योजनाओं का लाभ समुदाय तक नहीं पहुंच पा रहा
  • स्थानीय संसाधनों पर पहाड़िया समाज का अधिकार भी प्रभावित हो रहा है

इसके साथ ही वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ जल व रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से आदिम जनजाति आज भी वंचित है, जिस कारण उन्हें अन्य राज्यों में पलायन तक करना पड़ता है।


महासभा की प्रमुख मांगें

  1. 2 नवंबर 1894 को घोषित “सौरिया पहाड़िया कंट्री” को अलग कर पहाड़िया समुदाय को स्वायत्तता प्रदान की जाए।
  2. केन्द्रीय कानून PESA 1996 को अनुसूचित क्षेत्रों में तत्काल लागू किया जाए।
  3. संताल परगना टेनेंसी एक्ट 1949 की धारा 20 एवं 41 का उल्लंघन बंद किया जाए।
  4. अवैध तरीके से संचालित खदानों व क्रैशरों को तुरंत बंद किया जाए।
  5. झारखंड राज्य आदिम जनजाति आयोग का गठन किया जाए।
  6. राज्य आदिम जनजाति प्राधिकरण अविलंब बनाया जाए।
  7. आदिम जनजाति की महिलाओं को समान पेंशन ₹2500 दी जाए।

अंत में हिल असेंबली की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी मांगें सरकार के समक्ष रखने की बात कही गई।

कार्यक्रम में धर्मदेव पहाड़िया, मार्कोस माल्टो, मैसा पहाड़िया, सीताराम पहाड़िया, नारायण पहाड़िया, प्रेम प्रकाश देहरी, सोमरा पहाड़िया, पूषा पहाड़िया सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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